COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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शनिवार, 6 दिसंबर 2014

संविदा पर बहाल नर्सों को दिखाया बाहर का रास्ता, हड़ताल जारी

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पटना/गया : पटना मेडिकल काॅलेज हाॅस्पिटल (पीएमसीएच) और अनुग्रह नारायण मगध मेडिलक काॅलेज (एएनएमसीएच), गया की संविदा पर बहाल नर्सें अपनी नियुक्ति को स्थायी किये जाने की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। ज्ञात हो कि नर्सों की परीक्षा ली गयी थी। इनके कार्य क्षेत्र से ही सवाल पूछे गये। इसमें कुछ नर्स फेल हो गयीं। और फिर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
पीएमसीएच में संविदा पर बहाल 1000 नर्सों में से 347 स्थायी हो गयीं। फिलवक्त संविदा के आधार पर 653 नर्सें काम कर रही हैं। ज्ञात हो कि सूबे की 6758 नर्सों ने परीक्षा दी थी। इनमें से पीएमसीएच की 65 नर्स फेल कर गयीं। वहीं एएनएमसीएच की 170 में से 35 फेल हो गयीं। अब बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंस एसोसिएशन के बैनर तले 20 नवम्बर से पटना की नर्सें हड़ताल पर हैं। इसके अगले ही दिन यानी 21 नवम्बर को गया में भी हड़ताल शुरू कर दी गयी। पटना और गया में हड़ताल जारी है। 
इस संदर्भ में बिहार ‘ए’ ग्रेड नर्सेंज एसोसिएशन एवं बिहार ‘ए’ अनुबंध परिचारिका संघ की महामंत्री विथीका विश्वास का कहना है कि स्वास्थ्य मंत्री रामधनी सिंह और प्रधान सचिव दीपक कुमार ने 12 सितम्बर से जारी हड़ताल के समय कहा कि सिर्फ इंटरव्यू लिया जाएगा। और इसके आधार पर ही नौकरी स्थायी कर दी जाएगी। लेकिन, नर्सों की परीक्षा ली गयी। इसमें कई नर्सों को फेल कर दिया गया है। इसी के खिलाफ नर्सें हड़ताल पर हैं। स्थायी नर्सों का भी हड़ताल को समर्थन प्राप्त है। 
कुछ इसी तरह का मामला संविदा पर बहाल एएनएम नर्सों का भी है। कई बार नौकरी स्थायी करने की मांग को लेकर वे आंदोलन कर चुकी हैं। इन्हें भी प्रधान सचिव दीपक कुमार द्वारा आश्वासन दिया गया है कि जीएनएम नर्सों की नौकरी स्थायी करने के बाद एएनएम को भी विधिवत प्रक्रिया अपनाकर स्थायी कर दिया जायेगा। 
नर्सों का कहना है कि सरकार केवल इंटरव्यू का आश्वासन देकर 12 सितम्बर से जारी हड़ताल को समाप्त कराने में सफल हो गयी, मगर वादाखिलाफी कर राज्य कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से लिखित परीक्षा करवा दी गयी। और फिर आयोग ने मनमर्जी अनुसार रिजल्ट प्रकाशित कर दर्जनों नर्सों को नौकरी से बाहर करने की राह दिखा दिया। इसके खिलाफ हम फिर से हड़ताल पर जाने को बाध्य हो गए। हड़ताल में पटना, गया, दरभंगा, भागलपुर, मुजफ्फरपुर आदि जिलों की नर्सें शामिल हैं। इससे स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गयी है। अबतक कई मरीजों की मौत हो चुकी है।