COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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गुरुवार, 12 फ़रवरी 2015

इंडिया टुडे ने की अपने तीन एडिशन बंद करने की घोषणा

नई दिल्ली : भारत में मैगजीन बिजनेस के लिए अब कोई उम्मीद की किरण नहीं दिखाई देती, यही वजह है कि देश में एक के बाद एक मैगजीन या तो बंद हो रही हैं या फिर बंद होने के कगार पर हैं। देश में सबसे सफल मैगजीन ग्रुप में से एक लिविंग मीडिया ने भी अब इंडिया टुडे की तमिल, तेलुगू और मलयालम भाषा की वीकली मैगजीन को बंद करने की घोषणा कर दी है। 
इंडिया टुडे समूह के एडिटर-इन-चीफ अरुण पुरी ने एक इंटर्नल मेमो में लिखा, ‘हमें बीस सालों से नुकसान हो रहा है। हमने इसी उम्मीद में ही अपने घाटे को सहा कि एक दिन काया पलट  जाएगी, लेकिन हुआ नहीं। काफी विचार विमर्श के बाद हम इस नतीजे पर पहुंचे कि भविष्य में भी हमें इन मैगजीनों को लेकर बहुत उम्मीद नहीं है। इसलिए भारी मन से हमने ये फैसला लिया कि अब हम इन एडिशंस को बंद करेंगे। 
बताया जा रह है ग्रुप के चेन्नई ब्यूरो को भी अब छोटा किया जाएगा। पहले से ही अंग्रेजी एडिशन में सहयोग कर रहे कुछ सहयोगियों को ITE - (India Today English) में रखा जाएगा, जो कि इस ब्यूरो का हिस्सा होंगे।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन एडिशंस में कार्यरत कुछ कर्मचारियों को फिलहाल अच्छे मुआवजे के साथ कंपनी से विदा किया जाएगा।

ब्लॉग पर पोस्ट किया बयान सबूत नहीं : हाई कोर्ट

नई दिल्ली : ब्लॉग पर पोस्ट किया कोई भी बयान व्यक्तिगत राय होती है और उसे एक साक्ष्य के तौर पर नहीं लिया जा सकता। दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल अक्टूबर महीने में जस्टिस ने एक याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला सुनाया था। 
बता दें कि जनहित याचिका में जस्टिस काटजू के दावे के आधार पर सीबीआई जांच की मांग की थी। काटजू ने दावा किया था कि पूर्व चीफ जस्टिसों ने एक हाईकोर्ट जज को फायदा पहुंचाने के लिए आईबी रिपोर्ट को दरकिनार किया। इस पर जस्टिस जी. रोहिणी और राजीव सहाय एंडलॉ की बेंच ने याचिका खारिज कर दी थी। बेंच ने कहा था, ‘हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इस मामले में सीबीआई जांच का आदेश देने में जनहित क्या है? वह भी एक ब्लॉग में दिए गए बयान के आधार पर।’ 
काटजू ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि एक पूर्व सीजेआई ने उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ आईबी की प्रतिकूल रिपोर्ट के बावजूद उसका साथ देने के लिए अनुचित समझौते किए थे।
साभार : समाचार4मीडिया