COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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गुरुवार, 2 अप्रैल 2015

ग्रामीण प्रबंधन : गांव की माटी में रोजगार

 कॅरियर 
भारत की आत्मा गांवों में बसती है। करीब 70 फीसदी आबादी गांवों में बसती है। ऐसे में सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाओं का ध्यान हमेशा गांवों के सम्यक विकास की ओर रहता है। सरकार की पंचवर्षीय योजना में गांवों को विशेष महत्व दिया जाता है। इन सारी स्थितियों के बीच ग्रामीण प्रबंधकों की मांग आज काफी ज्यादा है। 
ग्रामीण प्रबंधक का मुख्य काम गांवों के हालात से रू-ब-रू होना है। गांव की स्थितियों का गहन अध्ययन, मिट्टी, जलवायु, नवीनतम तकनीकों की जानकारी के साथ बिजली, आवास, रहन-सहन, शिक्षा, लघु एवं कुटीर उद्योगों, औद्योगिक संभावनाओं आदि की जानकारी रखते हुए उसे गांवों से कैसे जोड़ा जाए, शामिल है। 
 अवसर 
अपना भविष्य तलाशते विभिन्न मल्टीनेशनल कंपनियों की नजर सदैव गांवों पर बनी रहती है। इसके लिए कुशल प्रबंधकों की आवश्यकता होती है। साथ ही अन्य गैर सरकारी संस्थाओं व एनजीओ में भी ग्रामीण प्रबंधकों की नियुक्ति की जाती है। 
 वेतनमान 
गांव की माटी से जुड़ना अपने आप में काफी रोमांचक है। इस रोमांच के साथ न्यूनतम सात हजार से बारह हजार तक की नौकरी किसी ग्रामीण प्रबंधक को मिल जाती है। काफी कुशल ग्रामीण प्रबंधक को मल्टीनेशनल कंपनियां ऊंचे वेतनमान पर रखती है।
 संस्थान 
नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ मैनेजमेंट टेक्नोलाॅजी, गाजियाबाद
देव संस्कृति विश्वविद्यालय, हरिद्वार
इंस्टिट्यूट आॅफ रूरल मैनेजमेंट, आनंद, गुजरात
नेशनल इंस्टिट्यूट आॅफ रूरल डेवलपमेंट, हैदराबाद
इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ रूरल डेवलपमेंट, सेक्टर 11, मानसरोवर, जयपुर
जेवियर इंस्टिट्यूट आॅफ मैनेजमेंट, भुवनेश्वर
अमृत विश्वविद्यापीठम, कोयम्बटूर।