COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna
COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

बुधवार, 20 अप्रैल 2016

देश में जल क्रांति का आह्वान

  • जल संसाधनों के बहु-उद्देश्यी विकास व मौजूदा चुनौतियां विषय पर संगोष्ठी आयोजित 

केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती ने देश में जल क्रांति का आह्वान किया है। नई दिल्ली में जल संसाधनों के बहु-उद्देश्यी विकास व मौजूदा चुनौतियां विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए उन्होंने देश के कुछ हिस्सों में सूखे पर चिंता व्यक्त किया। उन्होंने जल आयोग व अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वह सूखा प्रभावित क्षेत्रों के हर प्रखंड का दौरा करें और इस चुनौती से निपटने के लिए विस्तृत योजना तैयार करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में इस तरह के सूखे से निपटने के लिए देश के हर प्रखंड के लिए योजना तैयार रखनी चाहिए।
सुश्री भारती ने यह भी घोषणा किया कि अनुसूचित जाति बहुल 100 गांवों का चयन, जल संरक्षण के लिए ‘जल ग्राम योजना’ के तहत किया जाएगा। जल ग्राम, जल क्रांति अभियान के तहत एक योजना है, जिसे जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय ने शुरू किया है। इसमें हर जिले से पानी की कमी वाले दो गांवों का चयन कर, वहां जल संरक्षण के लिए समग्र विकास किया जाएगा। मंत्री ने जल संरक्षण के क्षेत्र में बाबा साहेब के योगदान का जिक्र किया जिसे की कम ही लोग जानते हैं। उन्होंने घोषणा की कि अगले वर्ष डॉ. अंबेडकर के जन्मदिवस को जल दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
संगोष्ठी का आयोजन केंद्रीय जल आयोग ने जल संसाधन, नदी विकास व गंगा संरक्षण मंत्रालय के अंतर्गत डॉ. भीम राव अंबेडकर की 125वीं जयंती मानने के क्रम में किया। इसमें जल क्षेत्र में अंबेडकर के योगदान पर चर्चा हुई और उनके सपनों को आगे ले जाने पर विचार किया गया।
जल संसाधन क्षेत्र के महत्वपूर्ण विशेषज्ञों जैसे कि आईसीआईडी के महासचिव श्री एसी त्यागी, आईसीएसएसआर के चेयरमैन व सीएसआरडी जेएनयू के अवकाशप्राप्त प्रो. सुखदेव थोराट, सीडब्ल्यूसी के पूर्व चेयरमैन श्री सुरेश चंद्र व जल संसाधन मंत्रालय के विशेष सचिव डॉ. अमरजीत सिंह ने संगोष्ठी को संबोधित किया।
केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य व सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री रामविलास पासवान, केंद्रीय सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री श्री थावर चंद गहलोत, केंद्रीय जल संसाधन राज्य मंत्री श्री सांवर लाल जाट, केंद्रीय रसायन व खाद राज्य मंत्री श्री हंसराज गंगराम अहीर, केंद्रीय राज्यमंत्री एमएचआरडी प्रो. (डॉ.) राम शंकर कठेरिया व संसद सदस्य तथा अखिल भारतीय एससी/एसटी महासंघ के राष्ट्रीय चेयरमैन श्री उदित राज ने भी इस अवसर पर संगोष्ठी को संबोधित किया।
डॉ. भीमराव अंबेडकर, भारतीय संविधान के मुख्य निर्माता व उत्पीड़ित तबके के नेता के रूप में विख्यात हैं। लेकिन जल संसाधन के प्रबंधन में उनके योगदान को कम ही लोग जानते हैं। वायसराय की कार्यकारिणी परिषद के सदस्य (श्रम) के रूप में अपने कार्यकाल (1942-1946) में डॉ. अंबेडकर ने देश में जल संसाधन के विकास के लिए अखिल भारतीय नीति बनाने की पहल की। इस काम को आगे बढ़ाने के क्रम में उन्होंने केंद्रीय जलमार्ग, सिंचाई व जहाजरानी आयोग का आधार रखा जो आगे चलकर आज के केंद्रीय जल आयोग के रूप में सामने आया।
डॉ. अंबेडकर ने नदियों के समग्र विकास के लिए नदी घाटी प्राधिकरण या निगम की वकालत की। उन्होंने देश में नदियों के तराई के बहु-उद्देश्यी विकास की अवधारणा दी। उनके प्रयास से ही आजादी के बाद दमोदर, महानदी व अन्य नदियों के बहुउद्देश्यी विकास के रूप में सामने आया।