COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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सोमवार, 23 मई 2016

प्रेमनगर में संकट

 मजाक डॉट कॉम 
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राजीव मणि
पूरा जंगल सूखे की चपेट में था। नदियां, तालाब, झड़ने सब सूख चुके थे। घास, झाड़ियां, बेलों का कहीं नामोनिशान नहीं था। फल-फूल असमय ही झड़ चुके थे। घने वृक्षों पर अब पत्तियां ही शेष थीं। प्रेमनगर जंगल का हाल बेहाल था। चारो ओर कोहराम मचा था। कमजोर-बीमार पशु-पक्षी भूख-प्यास से तड़प-तड़प कर मर रहे थे। प्रेमनगर जंगल का राजा अपनी प्रजा की दुर्दशा देख चिंतित था। राजा को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। 
शेर सिंह ने अपने महल में सभी मंत्रियों, दरबारियों, गुप्तचरों व अधिकारियों की एक बैठक बुलायी। शेर सिंह दहाड़ कर बोला, ‘‘आप सभी जंगल की दशा देख रहे हैं। किसी से कुछ छुपा नहीं है। लोग भूख-प्यास से मर रहे हैं। अब सभी को मिलकर इस समस्या का समाधान करना होगा। आदमजात की तरह एक-दूसरे को कोसने और बहसबाजी में समय गंवाना ठीक नहीं। अतः सभी गुप्तचरों, मंत्रियों व अधिकारियों को यह आदेश दिया जाता है कि वे अलग-अलग टोली बनाकर निकलें और बिगड़े हालात के सही कारणों का पता लगाएं। साथ ही, फिर से जंगलों में खुशहाली कैसे लौटे, यह भी बताना होगा। आपको मात्र एक सप्ताह का समय दिया जाता है। अगले सोमवार को हम यहीं इकट्ठा होंगे।’’ 
राजा का आदेश पाकर पशु-पक्षी निकल पड़ते हैं। अलग-अलग टोली बनाकर सभी अलग-अलग दिशाओं में कारण जानने जाते हैं। कुछ शहरों में प्रवेश करते हैं, कुछ गांवों में। कमजोर प्राणियों की टोली प्रेमनगर में ही रहकर कारणों का पता लगाती है। 
एक सप्ताह बाद सभी महल में जमा होते हैं। राजा शेर सिंह अपने आसन पर आकर बैठता है। ‘‘आप सभी को एकबार फिर यहां सही-सलामत देखकर मुझे खुशी हुई। आशा है आपने कारणों का पता लगा लिया होगा। अब एक-एक कर बताएं, क्या पता किया। जंबू हाथी, आप कहां गये थे ?’’ 
‘‘महाराज, मैं अपनी टोली के साथ आदमजात के गांवों में गया था। वहां विचित्र स्थिति थी। आदमजातों ने खेतों में जहरीले रसायन डाल रखे हैं। जहां गांवों में पहले लंबे-घने वृक्ष थे, अब समतल मैदान है। अब वहां भी कंक्रीट के जाल बिछते जा रहे हैं। पानी के लिए हाहाकार मचा है। लोग आत्महत्या कर रहे हैं। भूख-प्यास से आपस में ही लड़ रहे हैं।’’ जंबू हाथी ने सीधे-सीधे सब हाल कर सुनाया। 
‘‘हूं ..... आदमजात होते ही हैं ऐसे। अपनी करनी से मरते हैं और दूसरों को भी मुसीबत में डालते हैं !’’ शेर सिंह ने लंबी सांस लेते हुए कहा। फिर कुछ रूककर ...... ‘‘हां रंगा सियार, तुमने क्या पता किया ?’’ 
रंगा सियार हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। दो कदम आगे बढ़कर बोला, ‘‘महाराज, मैं नगरों में गया था। वहां तो सिर्फ ऊंचे-ऊंचे मकान ही हैं। सड़कें, गलियां सब पक्के। न कहीं पेड़, न पानी ! एकदम गरमी, जैसे आग बरसते हों। पूरा कंक्रीट का जाल जैसे जल रहा हो।’’ 
शेर सिंह को अब समझ आ रहा था, क्यों जंगलों की यह दुर्दशा हुई है। उन्होंने गरज कर कहा, ‘‘लगता है इन्हीं करतूतों का असर यहां भी है। नहीं तो हमारे प्रेमनगर की हालत भला ऐसी क्यों होती। ..... तुम क्या पता कर लाए केतकी कौए ?’’ 
‘‘महाराज, मैं तो उड़ते-उड़ते एक ऐसी जगह पहुंच गया, जहां एक महल जैसा घर था। मैं उस महल की खिड़की पर जा बैठा। वहां कुछ आदमजात बैठ जल संकट, सूखा और पर्यावरण की बिगड़ती स्थिति पर चरचा कर रहे थे। एक ने कहा, कमेटी बना दी जाए, कमेटी चार माह में सरकार को बताएगी कि ऐसा क्यों हो रहा है। फिर इसपर विचार किया जाएगा।’’ 
केतकी कौए की बात सुनकर शेर सिंह भड़क गये, बीच में ही बोल पड़े, ‘‘मूरख आदमजात ...... सबकुछ नाश करने के बाद भी नहीं जानता कि यह स्थिति क्यों उत्पन्न हुई। अब भी कमेटी बनाने की बात करता है। चार माह पता करने में लगाएगा ! तबतक तो न जाने क्या हो !’’ फिर कुछ सोचते हुए शेर सिंह कहता है, ‘‘हम प्रेमनगर वासी समय बरबाद नहीं करते हुए कल से ही जंगलों को बचाने में जुटेंगे। सभी को यह आदेश दिया जाता है कि कोई पानी बरबाद ना करे। जो कोई आदमजात जंगल में मिल जाए, उसे उसी समय सजा दी जाए। नहीं तो ये हमारे बचे-खुचे पेड़ों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। साथ ही सभी नये-नये पौधे लगाएं। सभा समाप्त की जाती है।’’ 
सभी पशु-पक्षी अपने-अपने घर को लौट गये। अगले दिन से पूरा प्रेमनगर जंगल को बचाने में जी-जान से जुट गया। किसी तरह एक माह गुजर गया। फिर एकदिन, झमाझम बरसात हुई। नदि, तालाब पानी से भरने लगे। हरियाली लौट आयी। पूरा प्रेमनगर खुशी से झूम उठा।