COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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मंगलवार, 3 मई 2016

‘राजमार्गों के पास हरियाली से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को फायदा’

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग और शिपिंग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में ‘राष्ट्रीय राजमार्गों के आसपास प्रतिरोपण’ पर एक कार्यशाला का उद्घाटन किया। अपने उद्घाटन संबोधन में श्री गडकरी ने कहा, ‘सड़कों को हरित राजमार्ग के अवसरों के रूप में देखा जाना चाहिए। पर्यावरण एवं सौन्दर्य पहलुओं के अलावा इनमें रोजगार सृजन की भी व्यापक संभावना है। अतः इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को काफी फायदा होगा। यहां तक कि इसे नरेगा योजना से भी जोड़ा जा सकता है।’ उन्होंने कहा, ‘अगर जरूरत पड़ी तो हम चयनित एजेंसी को तकनीकी एवं वित्तीय सहायता भी उपलब्ध कराएंगे। प्रोत्साहन के रूप में हर साल प्रत्येक राज्य के तीन विजेताओं को उल्लेखनीय कार्य के लिए पुरस्कृत किया जाएगा।’ उन्होंने कहा कि उपग्रह संबंधी प्रौद्योगिकी के जरिये परियोजनाओं पर नजर रखी जाएगी और परियोजनाओं के सफल होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। श्री गडकरी ने अनुसंधान संगठनों जैसे कि टेरी से पौधरोपण तकनीकों पर अपनी जानकारियों को साझा करने का आग्रह किया। मंत्री महोदय ने यह भी सुझाव दिया कि एनएचएआई राजमार्गों के आसपास स्थित क्षेत्रों में खुदाई करके विभिन्न सामग्री जैसे कि रेत एवं मिट्टी का इस्तेमाल कर सकती है और इससे गांव भी लाभान्वित होंगे, क्योंकि इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के लिए अत्यंत आवश्यक तालाबों एवं झीलों का सृजन होगा। 
राजमार्गों के आसपास हरियाली को बढ़ावा देने से होने वाले पर्यावरण संबंधी फायदों का उल्लेख करते हुए माननीय मंत्री महोदय ने परियोजना में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनों में जैव ईंधनों और प्रतिरोपण किये जाने वाले पौधों में जैव उर्वरकों का इस्तेमाल करने का आग्रह किया। 
एनएचएआई के चेयरमैन राघव चंद्र ने कहा, ‘हमने अपनी परियोजना लागत की एक प्रतिशत राशिको प्रतिरोपण, वृक्षारोपण, सौंदर्यीकरण और रख-रखाव कार्यों के लिए अलग से रखा है। हमारे पास पर्याप्त धन है और हम एसओपी की स्थापना, क्षमता निर्माण और सर्वश्रेष्ठ वैश्विक प्रथाओं को आत्मसात करने के लिए इसका इस्तेमाल करने का इरादा रखते हैं।’ 

‘मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम नियम 2016’

दूरसंचार विभाग ने ‘मोबाइल फोन हैंडसेट में पैनिक बटन और ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम नियम 2016’ अधिसूचित कर दिए हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने जून, 2014 में एक पहल के रूप में मोबाइल फोन में एक पैनिक बटन लगाने का मुद्दा उठाया था। यह जरूरी समझा गया था कि गंभीर संकट में फंसी महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए यह आवश्यक है कि कोई ऐसी सटीक व्यवस्था हो जिससे कि वे अपने किसी परिजन अथवा पुलिस अधिकारियों को आपातकालीन सिग्नल भेज कर अपनी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें। 
मंत्रालय ने अनेक हितधारकों और दूरसंचार विभाग के साथ इस मसले पर विचार-विमर्श किया था और इस बात पर विशेष जोर दिया था कि मोबाइल फोन पर एप के बजाय पैनिक बटन होना ज्यादा कारगर साबित होगा। यह दलील दी गई थी कि किसी संकट में फंसी महिला के लिए महज एक-दो सेकेंड ही अपने बचाव के लिए होते हैं, क्योंकि उस पर शारीरिक व यौन हमला करने वाला व्यक्ति अक्सर उसके मोबाइल फोन को अपने कब्जे में लेने के लिए झपटता है। विस्तृत विचार-विमर्श के बाद दूरसंचार विभाग और हितधारक आखिरकार मोबाइल फोन में यह सुविधा सुनिश्चित करने पर सहमत हो गए। 
तदनुसार, दूरसंचार विभाग ने पैनिक बटन पर नियमों को अधिसूचित कर दिया है। इसके लिए 22 अप्रैल, 2016 को जारी अधिसूचना के तहत 1 जनवरी, 2017 से सभी फीचर फोन में पैनिक बटन की सुविधा होगी, जिसके लिए इसके की-पैड के 5वें अथवा 9वें बटन को निर्धारित किया जाएगा। इसी तरह सभी स्मार्ट फोन में भी पैनिक बटन की सुविधा होगी, जिसके लिए इसके की-पैड के ऑन-ऑफ बटन को तीन बार बेहद थोड़े समय के लिए दबाना होगा। यही नहीं, 1 जनवरी, 2018 से सभी मोबाइल फोन में ऐसी विशेष सुविधा देनी होगी, जिससे उपग्रह आधारित जीपीएस के जरिये यह पता लगाया जा सकेगा कि किसी खास समय पर वह फोन किस स्थान पर था। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने यह ऐतिहासिक कदम उठाने पर प्रधानमंत्री को बधाई दी।