COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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बुधवार, 2 जनवरी 2019

कहानी संग्रह ‘मशहूर कहानियां’ का लोकार्पण

‘चलल जाला, चलल जाला सड़किया पर गाड़ी, हमार बैलगाड़ी सबसे अगाड़ी...’ लोकगीत को ताजा करते हुए 45 किताबों के लेखक/कथाकार डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह के कहानी-संग्रह ‘मशहूर कहानियां’ के द्वितीय संस्करण के लोकार्पण का आयोजन साईं-शिवम् पब्लिक स्कूल एवं शिवम् क्लासेज, पटना के सौजन्य से किया गया। उक्त गीत के चर्चित गायक जोगिंदर सिंह अलबेला की धरती दानापुर के बस-पड़ाव में ‘मशहूर कहानियां’ का लोकार्पण अनोखे अन्दाज में खुले आसमान के नीचे आम जनता के बीच बैलगाड़ी पर चढ़कर उक्त संस्थानों के निदेशक एवं महंत हनुमान शरण काॅलेज, पटना के प्राचार्य डाॅ. बिमल नारायण आर्य ने किया। 
उसके बाद बैलगाड़ी एवं दर्जन भर कारों एवं बसों के साथ गाजा-बाजा, लाउड स्पीकर, शंख, डमरू एवं घरीघंट बजाते हुए एवं पर्यावरण के मद्देनजर लोगों के बीच निःशुल्क पौधा बांटते हुए दानापुर बस-पड़ाव से कारगिल चैक, पटना तक लोकार्पण-मार्च निकाला गया। उस क्रम में जगह-जगह पर सड़क पर उक्त स्कूल के दर्जनांे बच्चे ड्रम बजाते हुए परेड का नजारा प्रस्तुत करते नजर आए। बच्चों का वह नजारा लोकार्पण-मार्च को बेहद आकर्षक बना रहा था। चूंकि पूरी दुनिया में कहीं भी किसी किताब को लेकर लोकार्पण-मार्च नहीं किया जाता। अतः दानापुर से पटना तक यह ‘मार्च’ लोगों के आकर्षण का केन्द्र बना रहा। उक्त लोकार्पण-मार्च में सैकड़ों प्रोफेसर, बुद्धिजीवी एवं छात्र-छात्राएं शामिल थे। लोक गायक अलबेला जी के उक्त गीत को साकार करने हेतु बैलगाड़ी को सबसे आगे रखा गया और इंजनवाली सभी गाड़ियां उसके पीछे-पीछे चल रही थीं। सड़क के किनारे और छतों से ऐसा नजारा देख रहे हजारों-हजार लोग प्रकट रूप से इस लोकार्पण-उत्सव के साक्षी बने। कारगिल चैक, पटना पहुंचने पर भी सामूहिक रूप से उक्त किताब प्रदर्शित की गई। पूरे रास्ते लोकार्पण-मार्च का नेतृत्व साईं-शिवम् पब्लिक स्कूल एवं शिवम् क्लासेज के निदेशक तथा महंत हनुमान शरण काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. बिमल नारायण आर्य, कथाकार डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह, साईं-शिवम् पब्लिक स्कूल की निदेशिका श्रीमती कमला कुमारी एवं प्राचार्या प्रो. पूजा सिंह एवं प्रो. संजय ठाकुर कर रहे थे। उक्त अवसर पर प्राचार्य डाॅ. आर्य एवं कथाकार डाॅ. सिंह ने संयुक्त रूप से मीडिया को बतलाया कि पुस्तक के साथ ऐसे आयोजन के माध्यम से समाज में संवेदना, ज्ञान एवं जागरूकता लाना ही हमारा उद्देश्य है। ‘मशहूर कहानियां’ नामक पुस्तक ऐसे ही उद्देश्यांे को पूरा करती है। ‘मार्च’ में शामिल लोग जहां-तहां रुक-रुक कर पुस्तक के बारे में बतलाने का काम भी कर रहे थे।
शिक्षिक-शिक्षिकाओं के निर्देशन में बैण्ड/ड्रम बजाने वाले छात्र-छात्राएं ये थे - यामिनी, अंकित, शिवानी, खुशी, स्नेहा, आसना, नवदीपा आलोक अमन, रिमझिम, जिया, सोनम, आकंाक्षा, अनुष्का, नन्दनी, सिमी, सुरुचि, रागिनी, मुस्कान, रीतिका, स्वर्णरेखा, आस्था, नेहा, प्रिया, सागर, रोहित, रीतेश, विकास, प्रियांसु, सुमित, मनीष, रवि अमन, रोहन, ए.के. राज, आशीष, यशवंत, सिद्धार्थ, अमर कान्त, मोनू, ध्रुव, सूरज, आर्यन, पीयुष, आदित्य, सत्यम, शाहिल, आशुतोष, कृष, अभिषेेक। 
तख्ती/स्लोगन की जिम्मेवारी श्रेया कुमारी, कामिनी कुमारी, मोहित कुमार, देवराज, यामिनी, खुशी, पंकज, हिमांशु, रोहित कुमार, कृष इत्यादि ने ले रखी थी। 
उक्त लोकार्पण-मार्च को सफल बनाने में प्राचार्य डाॅ. बिमल नारायण आर्य, कथाकार डाॅ. लालजी प्रसाद सिंह के अलावा उक्त स्कूल की निदेशिका श्रीमती कमला कुमारी एवं प्राचार्या प्रो. पूजा सिंह, प्रो. संजय ठाकुर, अंजली कुमारी, सिंकूू, प्रतिमा, प्रो. पंकज कुमार, प्रो. रंजना कुमारी, सी.एन. आर्य, पुष्पा श्रीवास्तव, नवनीता बेरा, मनोज कुमार, दीपक कुमार, प्रो. रीना सिन्हा, प्रियंका झा, सुनील कुमार, विक्टोरिया आनन्द, धनंजय कुमार, प्रकाश चन्द्र आर्य, शिखा सिंह, प्रो. मीरा कुमारी, बी. थाॅमस, विभूति झा, मोना कुमारी, कोमल, उमेश महतो, संतोष गुप्ता, सीमा शर्मा, वीणा ंिसंह, अमित कुमार, सूजल, पिन्टू कुमार, विद्या भारती, लक्ष्मी कुमारी, दुर्गा कुमारी, प्रशांत कुमार, पूनम सिन्हा इत्यादि ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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