COPYRIGHT © RAJIV MANI, Journalist, Patna

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रविवार, 23 अप्रैल 2017

नव काव्यांजलि एक निर्भीक अभिव्यक्ति

समीक्षक : बसंत कुमार राय
 पुस्तक समीक्षा 
राजीव मणि द्वारा संपादित ‘नव-काव्यांजलि’ में ‘अपनी बात’ कहते हुए संपादक की यह उक्ति अच्छी लगी कि संग्रह में मौजूद गलतियों की जवाबदेही उन पर है, लेकिन खूबियों का श्रेय कवियों को जाता है। प्रश्न उठता है कि किस प्रकार की गलतियों के लिए वे दायित्व ले रहे हैं? क्या इनमें रचनागत त्रुटियाँ भी शामिल है? यदि हाँ, तो कमियों के बचाव के लिए उनका पक्ष अनूठा है।
 किसी भी कविता में कविता इस बात पर निर्भर करती है कि कवि वस्तु को किस तरह देखता है, क्योंकि वस्तु की भौतिक सत्ता कविता में गौण हो जाती है। ऐसे में कवि अपनी अंतर्दृष्टि के सहारे उसे संरचनागत विस्तार देता है। यहीं वह प्रस्थान बिंदु भी है, जहाँ से कवि अपनी निजता का अतिक्रमण भी करता चलता है। वस्तु की सर्वस्वीकार्यता प्रस्तुत करने की यह प्रक्रिया कवि की अवलोकन क्षमता, संवेदना की गहराई, रचने के लिए शिल्प के चुनाव के विवके पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है। यहाँ रचना के अबूझ बन जाने का खतरा रहता है, जिससे आधुनिक कविता बुरी तरह पीड़ित है, लेकिन पाठक रचना को छोड़ रचनाकार (कवि) का नाम देखकर वाह-वाह कर देते हैं।
Nav Kavyanjali
ऐसा भी होता है कि वस्तु का विन्यासगत विस्तार करते-करते कवि स्थूल विवरणों के सहारे अपने कत्र्तव्य की इतिश्री समझ लेता है। तब कविता निश्प्राण हो जाती है। यह एक बड़ी कमजोरी है, जिसको देखते हुए प्रकाशक कविता की पुस्तक छापने से घबराते हैं। यह संग्रह इस कमजोरी से मुक्त नहीं है, लेकिन संपादक कुछ अच्छी रचनाओं को सामने रखकर ‘नव काव्यांजलि’ प्रकाशित करने के लिए निश्चितरूपेण प्रशंसा के पात्र हैं। 
संग्रह की कुछ कविताओं में जीवन का मर्म, उसकी पेंददगियां, उसमें निहित प्रेम और करूणा, ईष्र्या-द्वेष, आशा-आकांक्षा, भ्रम और छल, संघर्ष, हिंसा और प्रतिहिंसा का विद्रूप खुलकर सामने आया है। दरअसल में काव्य रचना की चारित्रिक खूबियां हैं कि वह अपनी बनावट में लोकतांत्रिक हैं। राजनीतिक लोकतंत्र की अवधारणा से परे रचनागत लोकतांत्रिकता कविता की विशिष्ट पहचना है। यह तब भी कविता में थी, जब धरती पर लोकतंत्र नहीं था। कुम्भन दास की यह उक्ति-भक्तन को कहां सीकरी सो काम, स्वयं में एक पुख्ता प्रमाण है। ऐसे तो भक्ति आंदोलन का सूत्रपात ही लोकोन्मुखी प्रवृत्तियों के कारण लोकभाषाओं में हुआ। इसलिए न्यायसंगत मान्यता के तहत कविता संपूर्ण चराचर की निर्भीक अभिव्यक्ति है। मुझे खुशी हुई कि इस संग्रह में ज्यादातर कवियों की चिन्ता में आमजन सहित नदी, पेड, चिड़ियाँ, पहाड़ आदि शामिल हैं। 
सृष्टि का स्वरूप ही काव्यमय है। कोई भी कविता इस सत्य के अनुरूप ही शलाध्य हो सकती है। कहना न होगा कि मनुष्य ने काव्यमयता को बिगाड़ने की भरपूर कोशिश की है। यह कोशिश लगातार जारी है। कविता ऐसी कोशिश के खिलाफ किस तरह खड़ी है, यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती है। संग्रहित कवियों से यह उम्मीद की जाती है कि इस आसन्न चुनौती से वे मुंह न मोड़ेंगें।
समीक्षक : बसंत कुमार राय

‘कॉल ड्रॉप्स की समस्या घर के भीतर अधिक’

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : ग्राहकों से सीधी प्रतिक्रिया प्राप्त करने के लिए दूरसंचार विभाग ने 23 दिसंबर, 2016 को दिल्ली, मुंबई, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गोवा में एक इंटेग्रेटिड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आईवीआरएस) प्रणाली की शुरूआत की है, जिसका 12 जनवरी, 2017 को पंजाब और मणिपुर के अलावा अन्य राज्यों में विस्तार किया गया है। पंजाब और मणिपुर में आईवीआरएस प्रणाली की शुरूआत 16 मार्च, 2017 को हुई। इस प्रणाली के माध्यम से ग्राहकों को शॉर्ट कोड 1955 से आईवीआरएस कॉल प्राप्त होती हैं और कॉल ड्रॉप्स की समस्या के बारे में कुछ प्रश्न पूछे जाते हैं। ग्राहक इसी शॉर्ट कोड 1955 पर टोल फ्री एसएमएस भी भेज सकते हैं, जिसमें उनके उस शहर, नगर, गांव का नाम का उल्लेख हो, जहां वे अक्सर कॉल ड्रॉप्स की समस्या से ग्रस्त हैं।
आईवीआरएस प्रणाली की 23 दिसम्बर, 2016 को शुरूआत से लेकर 28 फरवरी, 2017 तक पूरे देश में सभी टीपीएस के ग्राहकों को 16,61,640 सफल आउटबाउंड कॉल की गई हैं। लगभग 2,20,935 ग्राहकों ने सर्वेक्षण में भाग लिया, जिनमें से लगभग 1,38,072 (62.5ः) ग्राहकों ने कॉल ड्रॉप्स की सूचना दी है। इस प्रतिक्रिया से यह पता चला है कि कॉल ड्राप्स की समस्या घर के अंदर अधिक गंभीर है। इस प्रतिक्रिया को समयबद्ध तरीके से कार्रवाई करने के लिए प्रति सप्ताह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं के साथ साझा किया जाता है। टीएसपी ने दूर संचार विभाग द्वारा भेजे गए आईवीआरएस फीडबैक डाटा का उपयोग करने के लिए एक विस्तृत तंत्र स्थापित किया है।
टीएसपी, हर पखवाड़े, दूर संचार विभाग कार्यबल को कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत कर रहा है। 15-28 फरवरी, 2017 के पखवाड़े के लिए, टीएसपी द्वारा 43,403 फीडबैक मामले जांच हेतु लिए। कॉल ड्रॉप्स समस्या के बारे में अतिरिक्त जानकारी के लिए ग्राहकों को टेलीफोन कॉल और एसएमएस करने के बाद 7,210 मामलों की समाधान हेतु पहचान की गई। इस पखवाड़े के दौरान 2467 मामलों को ऑप्टिमाइजेशन, हार्डवेयर / बिजली की समस्याओं के समाधान, क्षेत्र के दौरे आदि के माध्यम से सुलझाया गया और सकल आधार पर आईवीआरएस की शुरूआत से लेकर अभी तक इस पहल के दौरान 9328 मामलों को इस पहल के माध्यम से हल किया गया है।
इसके अलावा, 5529 मामले कॉल ड्रॉप समस्या से संबंधित नहीं थे, लेकिन वे डेटा, रोमिंग, बिलिंग, एमएनपी, मोबाइल डिवाइस आदि की समस्या से जुड़े थे। ऐसे मामलों की टीएसपी ने आवश्यक कार्रवाई करने के लिए पहचान की। टीएसपी ने आने वाले समय में लगभग 603 नई साइटें / बूस्टर लगाने की योजना बनाई गई है। दूर संचार कार्यबल आईओआरएस प्रणाली से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक महीने में एक बार टीएसपी के साथ बैठक कर रहा है। मंत्री महोदय का कार्यालय, आईवीआरएस प्रणाली के परिचालन के बारे में नियमित समीक्षाओं का भी आयोजन कर रहा है।

सरकार ने सभी वाहनों से बत्तियां हटाने का फैसला किया 

नई दिल्ली : देश में स्वस्थ लोकतांत्रिक मूल्यों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में देश में सभी श्रेणियों के वाहनों के ऊपर लगी सभी तरह की बत्तियां हटाने का फैसला किया। सरकार का स्पष्ट मानना है कि वाहनों पर लगी बत्तियां वीआईपी संस्कृति का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक देश में इसका कोई स्थान नहीं है। उनका कुछ भी औचित्य नहीं है। हालांकि आपातकालीन और राहत सेवाओं, एम्बुलेंस, अग्नि शमन सेवा आदि से संबंधित वाहनों पर बत्तियों लगाने की अनुमति होगी। इस फैसले को ध्यान में रखते हुए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय कानून में आवश्यक प्रावधान करेगा।

2100 करोड़ रुपये की सीवेज उपचार परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : नमामी गंगे कार्यक्रम को एक बड़े प्रोत्साहन के रूप में, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने 2154.28 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के साथ 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह राशि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड एवं दिल्ली राज्यों में प्रति दिन 188 मिलियन लीटर (एमएलडी) (लगभग) की नई सीवेज उपचार क्षमता के सृजन, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 596 एमएलडी का पुनर्वास, वर्तमान एसटीपी क्षमता के 30 एमएलडी का उन्नयन, अवरोधन एवं डायवर्जन कार्यों तथा 145.05 किलोमीटर सीवरेज नेटवर्क पर खर्च की जाएगी।
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विश्व होम्योपैथी दिवस पर दो दिवसीय सम्मेलन संपन्न

नई दिल्ली : विश्व होम्योपैथी दिवस पर नई दिल्ली में दो दिवसीय सम्मेलन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। समारोह में आयुष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीपद येस्सो नाइक मुख्य अतिथि थे। समारोह की अध्यक्षता सांसद और आयुष मंत्रालय की संसदीय स्थायी समिति के सदस्य डॉ. मनोज रजोरिया ने की। विश्व होम्योपैथी दिवस होम्योपैथी के जन्मदाता जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन की 262वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित किया गया। डॉ. क्रिस्टियानी फ्रेडरिक सैमुएल हनिमैन महान विद्वान, भाषाविद और प्रख्यात वैज्ञानिक थे। सम्मेलन का थीम होम्योपैथी में अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ाना था। 
सम्मेलन का आयोजन आयुष मंत्रालय की केन्द्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद द्वारा किया गया। इस अवसर पर आयुष मंत्री ने हनिमैन के योगदान और उनके द्वारा प्रकृति के अचूक कानून के आधार पर चिकित्सा व्यवस्था की खोज करने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि आयुष मंत्रालय आयुष प्रणाली में और अधिक साक्ष्य लाने और अंतर्राष्ट्रीय मान्य साधनों से प्रणाली को वैध बनाने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने विश्वसनीय होम्योपैथी अनुसंधान में सीसीआरएच द्वारा लगाई गई छलांग की सराहना की। उन्होंने शिष्टमंडल को बताया कि सीसीआरएच ने क्वांटम भौतिकी जैवइंजीनियरिंग, वाइरौलॉजी, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान जैसे क्षेत्रों में विशिष्ट कार्य के लिए प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संस्थानों से सहयोग किया है। इस काम में न केवल होम्योपैथी को मान्यता मिली है, बल्कि संबद्ध वैज्ञानिकों का ध्यान भी इस उपचार प्रणाली की ओर गया है। हमें होम्योपैथी और नैनोविज्ञान तथा जैनोमिक विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान करने की आवश्यकता है। 
इस अवसर पर पहली बार सीसीआरएच ने होम्योपैथी अनुसंधान में योगदान करने वालों को पुरस्कार प्रदान किया। श्रीपद नाइक ने श्रेष्ठ शोध के लिए लाइफ टाइम पुरस्कार डॉ. ए. आर. खुदाबक्श, श्रेष्ठ शिक्षक के लिए प्रोफेसर चतुर्भुज नायक, श्रेष्ठ शोध पत्रों के लिए डॉ. कुसुम एस. चंद और डॉ. अर्चना नारंग, युवा वैज्ञानिकों के लिए डॉ. सी. एल. पाटिल तथा डॉ. देवदत्त नायक को पुरस्कृत किया। सम्मेलन में आयुष मंत्री ने होम्योपैथी में गुणवत्ता सम्पन्न एमडी डिसरटेशन के लिए पुरस्कार विजेताओं की घोषणा की। 
अपने संबोधन में श्री मनोज रजोरिया ने होम्योपैथी के समग्र विकास के लिए गुणवत्ता सम्पन्न शिक्षा और शोध की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि होम्योपैथी के लिए राष्ट्रीय आयोग बनाने का प्रस्ताव है। 
होम्योपैथिक अस्पतालों के एनएबीएच प्रमाणन सहित उच्च गुणवत्ता युक्त अनुसंधान माध्यमों द्वारा सार्वजनिक स्वास्थ्य और महामारियों में होम्योपैथी की भूमिका के महत्वपूर्ण कारक सहित अनुसंधान करने के लिए कॉलेज के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने तथा होम्योपैथिक अनुसंधान के प्रमुख क्षेत्रों को विचार-विमर्श के लिए पांच सत्रों में विभक्त किया गया। प्रमुख सत्रों की अध्यक्षता अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय संसाधन व्यक्तियों द्वारा की गई। इनका मुख्य उद्देश्य होम्योपैथिक अनुसंधान की जटिलताओं को समझाने के लिए सभी हितधारकों को शिक्षित करना तथा सभी प्रकार के प्रतिनिधियों को गुणवत्तायुक्त अनुसंधान माहौल के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराना था। इन प्रतिनिधियों में अनुसंधानकर्ता, चिकित्सक नीति निर्माता, चिकित्सा छात्र और होम्योपैथिक उद्योग के प्रतिनिधि शामिल थे। 
आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव ए. के. गनेरीवाला और संयुक्त सचिव पी. एन. रंजीत कुमार, पद्मश्री डाॅ. वी. के. गुप्त, अध्यक्ष वैज्ञानिक सलाहकार समिति, सीसीआरएच, डॉ. लेक्स रूटेन (नीदरलैंड्स), डॉ. आइजैक गोल्डन (ऑस्ट्रेलिया) और डाॅ. मार्टिअन ब्रांड्स (नीदरलैंड्स) सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति भी इस आयोजन में शामिल हुए।
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सोमवार, 27 मार्च 2017

एशिया का पहला एयरबस प्रशिक्षण केंद्र नई दिल्ली में खुलेगा

नई दिल्ली : एयरबस नई दिल्ली स्थित एयरोसिटी में एक प्रशिक्षण केंद्र खोलेगा, ताकि एयरबस पॉयलटों और इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया जा सके। इस संबंध में नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू, एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स और नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री की उपस्थिति में एक आयोजन किया गया।
इस अवसर पर नागरिक उड्डयन मंत्री पी. अशोक गजपति राजू ने कहा कि भारत में यात्री विमानों की मांग तेजी से बढ़ रही है, जिसके लिए यह आवश्यक हो गया है कि कुशल पॉयलटों और इंजीनियरों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए एक प्रशिक्षण केंद्र की भी आवश्यकता है, ताकि कुशल श्रम शक्ति का विकास हो।
एयरबस के कार्यकारी अधिकारी टॉम एंडर्स ने कहा कि एयरबस का प्रशिक्षण केंद्र एशिया में अपनी तरह का पहला केंद्र होगा, जो इस बात का प्रतीक है कि भारत के साथ एयरबस की साझेदारी कितनी गहरी है। उल्लेखनीय है कि भारत में एयरबस के 250 से अधिक विमान संचालन में हैं और इंडियन एयरलाइन्स ने 570 से अधिक विमानों का आर्डर दिया है।
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नमामि गंगे के लिए 19 अरब रुपये मंजूर

उत्तराखंड, बिहार, झारखंड और दिल्ली में शुरू होंगी 20 परियोजनाएं 
नई दिल्ली : राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) की कार्यकारी समिति ने गंगा को स्वच्छ बनाने के अभियान में तेजी लाने के लिए करीब 19 अरब रुपये लागत वाली परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान कर दी है। कार्यकारी समिति की 02 मार्च, 2017 को हुई बैठक में मंजूर की गई 20 परियोजनाओं में से 13 उत्तराखंड से सम्बद्ध हैं, जिनमें नए मलजल उपचार संयंत्रों की स्थापना, मौजूदा सीवर उपचार संयंत्रों का उन्नयन और हरिद्वार में मलजल नेटवर्क कायम करने जैसे कार्य शामिल हैं। इन सभी पर करीब 415 करोड़ रुपये की लागत आएगी। हरिद्वार देश के सर्वाधिक पवित्र शहरों में से एक है, जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु आते हैं। अनुमोदित योजना का लक्ष्य न केवल शहर के 1.5 लाख स्थानीय निवासियों द्वारा, बल्कि विभिन्न प्रयोजनों के लिए इस पवित्र स्थान की यात्रा करने वाले लोगों द्वारा उत्सर्जित मलजल का उपचार भी करना है। इन सभी परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार द्वारा पूर्ण वित्त पोषण किया जाएगा। यहां तक कि इन परियोजनाओं के प्रचालन और रख-रखाव का खर्च भी केंद्र सरकार वहन करेगी।
उत्तराखंड में अनुमोदित अन्य परियोजनाओं में से चार परियोजनाएं अलकनंदा नदी का प्रदूषण दूर करने से संबंधित है, ताकि नीचे की तरफ नदी की धार का स्वच्छतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके। इसमें गंदे पानी के नालों को नदी में जाने से रोकने के लिए उनका मार्ग बदलना, बीच मार्ग में अवरोधक संयंत्र लगाना और साथ ही चार महत्वपूर्ण स्थानों - जोशीमठ, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग और कीर्तिनगर में नए लघु एसटीपीज लगाना शामिल है, जिन पर करीब 78 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इनके अलावा गंगा का प्रदूषण दूर करने के लिए ऋषिकेश में 158 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली एक बड़ी परियोजना का अनुमोदन किया गया है। गंगा जैसे ही पर्वत से उतरकर मैदानी भाग में प्रवेश करती है, तो वहीं ऋषिकेश से नगरीय प्रदूषक गंगा में मिलने शुरू हो जाते हैं। गंगा को इन प्रदूषकों से छुटकारा दिलाने के लिए ऋषिकेश में यह सर्व-समावेशी परियोजना शुरू करने को हरी झंडी दिखाई गयी है। इससे न केवल सभी शहरी नालों को ऋषिकेश में गंगा में जाने से रोका जा सकेगा, बल्कि उत्सर्जित जल को उपचार के जरिए फिर से इस्तेमाल योग्य भी बनाया जाएगा। ऋषिकेश संबंधी इस विशेष परियोजना में लक्कड़घाट पर 26 एमएलडी क्षमता के नये एसटीपी का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली की भी व्यवस्था है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में 665 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से उत्कृष्ट प्रदूषक मानकों के साथ 564 एमएलडी क्षमता के अत्याधुनिक ओखला मलजल उपचार संयंत्र के निर्माण की परियोजना भी अनुमोदित की गयी है। यह संयंत्र मौजूदा एसटीपी फेज- 1, 2, 3 और 4 का स्थान लेगा। इसके अलावा पीतमपुरा और कोंडली में 100 करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित लागत वाली नई मलजल पाइप लाइनें बिछाने की दो परियोजनाएं भी मंजूर की गयी है, ताकि रिसाव रोका जा सके।
पटना में कर्मालिचक और झारखंड में राजमहल में 335 करोड़ रुपये से अधिक लागत से मलजल निकासी संबंधी कार्यों का भी कार्य समिति की बैठक में अनुमोदन किया गया। वाराणसी में, जहां वर्ष भर लाखों तीर्थ यात्री आते हैं, गंगा के प्रदूषण की समस्या का समाधान करने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल वाली 151 करोड़ रुपये की परियोजना का भी कार्यकारिणी की बैठक में अनुमोदन किया गया।
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IIFCL ने कैंसर मरीजों के लिए 3.5 करोड़ रुपये दिये

 संक्षिप्त खबरें 
नई दिल्ली : स्वास्थ्य मंत्रालय के कैंसर मरीज कोष (सीएसआर) के लिए सीएसआर योजना के अंतर्गत कैंसर से पीड़ित गरीब मरीजों के उपचार के लिए सार्वजनिक क्षेत्र की इकाईयों से योगदान देने का आग्रह किया गया था। इंडिया इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी लिमिटेड (आईआईएफसीएल) ने इस दिशा में अगुवाई की और 2015-16 में 7.5 करोड़ रुपये राशि का योगदान दिया। 2016-17 के दौरान आईआईएफसीएल से प्राप्त सीएसआर योगदान से 385 कैंसर के मरीजों को लाभ हुआ है। आईआईएफसीएल के मुख्य प्रबंध निदेशक एस. बी. नायर ने कल 3.50 करोड़ रुपये का चेक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते को प्रदान किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार अरुण कुमार झा और आईआईएफसीएल के मुख्य महाप्रबंधक पी. आर. जयशंकर भी उपस्थित थे।

बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम ने 2.5 करोड़ रुपये दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 2.5 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम अभय कुमार उपाध्याय, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम मुख्य अभियंता वशिष्ठ नारायण, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के सचिव आनंद प्रकाश श्रीवास्तव, बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम के मुख्य लेखा पदाधिकारी हेमंत कुमार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने पुलिस महानिदेशक सह अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम को बिहार पुलिस भवन निर्माण निगम की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 2.5 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. ने एक करोड़ दिये

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी ने बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए एक करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी, विकास आयुक्त शिशिर सिन्हा, प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव चंचल कुमार एवं मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने नगर विकास मंत्री महेश्वर हजारी एवं प्रधान सचिव नगर विकास चैतन्य प्रसाद को बिहार शहरी आधारभूत संरचना निगम लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।

कम्फेड ने 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा

पटना : विधानसभा स्थित मुख्यमंत्री कार्यालय कक्ष में मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह ने बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. (कम्फेड) की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 3 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। इस असवर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह, मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह, जदयू नेता श्याम रजक, मुख्यमंत्री के सचिव मनीष कुमार वर्मा, सचिव पशु एवं मत्स्य संसाधन एन. विजया लक्ष्मी, महाप्रबंधक बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. सीमा त्रिपाठी उपस्थित थी। मुख्यमंत्री ने मंत्री पशु एवं मत्स्य संसाधन अवधेश कुमार सिंह को बिहार स्टेट मिल्क काॅपरेटिव फेडरेशन लि. की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष में 3 करोड़ रुपये का चेक देने के लिए धन्यवाद दिया।
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रविवार, 12 मार्च 2017

Happy Holi

केंद्र 61.89 करोड़ से सजावटी मछली पालन पर पायलट परियोजना लांच करेगा

सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना के लिए 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित
नई दिल्ली : कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के पशुपालन, डेयरी तथा मछलीपालन विभाग सजावटी मछलीपालन की क्षमता और व्यापकता को महसूस करते हुए 61.89 करोड रुपये की लागत से पायलट आधार पर सजावटी मछलीपालन परियोजना लांच करेगा। इस पायलट परियोजना को लागू करने के काम में मछलीपालन व्यवसाय और निर्यात में लगे लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए सजावटी मछलीपालन के सशक्त और समग्र विकास का वातावरण बनाना है। क्लस्टर आधारित खेती तथा प्राकृतिक संसाधन-स्वदेशी और समुद्री-की वास पुर्नस्थापना और हितधारकों में जागरूकता पैदा करके सजावटी मछली उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष क्षेत्रों की पहचान की गयी है।
पायलट परियोजना की प्रमुख विशेषताएं हैं : (1) क्लस्टर आधार पर सजावटी मछलीपालन को प्रोत्साहित करना (2) सजावटी मछलीपालन और निर्यात से आय को सुदृढ़ बनाना (3) ग्रामीण और ग्रामीण क्षेत्र के बाहर की आबादी के लिए रोजगार अवसरों का सृजन करना (4) सजावटी मछलीपालन को फलता-फूलता व्यवसाय बनाने के लिए आधुनिक टेक्नोलॉजी और नवाचार का उपयोग।
पायलट परियोजना लागू करने के उद्देश्य से क्षमता वाले 8 राज्य - असम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल चिन्हित किए गए हैं। पायलट परियोजना की गतिविधियों को चार प्रमुख समूहों में रखा गया है, ये हैं - (क) सजावटी मछली उत्पादन से संबधित गतिविधियां यानी घर के पीछे के हिस्से में मछलीपालन ईकाइयां स्थापित करना, मंझोले आकार की ईकाइयां बनाना, एकीकृत प्रजनन और उत्पादन इकाइयां लगाना (ख) एक्वेरियम फैब्रिकेशन, व्यापार तथा मार्केटिंग से संबंधित गतिविधियां (ग) सजावटी मछलियों के प्रोत्साहन के लिए गतिविधियां तथा (घ) कौशल विकास और क्षमता सृजन से जुड़ी गतिविधियां।
सजावटी मछलीपालन की पायलट परियोजना राष्ट्रीय मछली पालन विकास बोर्ड (एनएफडीबी) राज्यों / केन्द्र शासित प्रदेशों के मछलीपालन विभागों के माध्यम से लागू करेगा। सजावटी मछलियों की पायलट परियोजना के अंतर्गत धन वितरण व्यवस्था सीएसएस ब्लू क्रांति मछलियों के एकीकृत विकास और प्रबंधन के धन वितरण व्यवस्था के अनुरूप हैं। पायलट परियोजना लागू करने में केन्द्र सरकार के दायित्वों को पूरा करने के लिए वित्तीय संसाधन जहां तक संभव होगा, सम्मिलित रूप में भारत सरकार की अन्य योजनाओं की दी गयी निधि को तर्कसंगत बनाकर जुटाए जाएंगे। प्रस्तावित पायलट परियाजना लागू करने के लिए कम से कम 1 वर्ष की अवधि आवश्यक है।
दूसरी ओर सजावटी मछलीपालन परंपरागत मछलीपालन क्षेत्र का एक उप क्षेत्र है, जिसमें प्रजनन और सामान्य जल और समुद्री जल में पालन सुविधा होती है। यद्यपि सजावटी मछलीपालन खाद्य और पोष्टिकता सुरक्षा में प्रत्यक्ष रूप से कोई योगदान नहीं करता, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र और ग्रामीण क्षेत्र से बाहर की आबादी के लिए विशेषकर महिलाओं और बेरोजगार युवाओं को अंशकालिक गतिविधियों के लिए आजीविका और आय प्रदान करता है। भारत में सजावटी मछली पालन उद्योग आकार में छोटा है, लेकिन विकास की संभावनाओं से भरपूर है। इसके प्रमुख आकर्षणों में कम समय में कम उत्पादन लागत और अधिक प्राप्ति तथा घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में बढती मांग है। अपने देश के विभिन्न हिस्सों में समुद्री सजावटी मछलियों की लगभग 400 प्रजातियां हैं और सामान्य जल में सजावटी मछलियों की 375 प्रजातियां हैं। 
मछली पालन और जल कृषि क्षेत्र मुख्य रूप से परोसी जाने वाली मछलियों के उत्पादन पर बल देता है। परिणामस्वरूप सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में मछली के उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए धन लगाया जाता है।
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यूजी-पीजी स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में नामांकन को राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श

नई दिल्ली : स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में, देश में एकल मेडिकल प्रवेश परीक्षा शुरू करने के बाद, अब स्नातक और स्नातकोत्तर स्तरों पर चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए राज्य स्तर पर सामान्य परामर्श के लिए प्रावधान किया है। एमसीआई के प्रासंगिक नियमों में किए गए संशोधनों के अनुसार, राज्य / संघ राज्य क्षेत्र के स्तर पर निर्दिष्ट प्राधिकरण राज्य में सभी मेडिकल शिक्षा संस्थानों के लिए सामान्य परामर्श करेगा, चाहे इसकी स्थापना केंद्र सरकार, राज्य सरकार, विश्वविद्यालय, मानद विश्वविद्यालय, ट्रस्ट, सोसाइटी, कंपनी, अल्पसंख्यक संस्थाएं या निगम द्वारा की गई हो।
इस कदम से नामांकन की प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और निजी कॉलेजों द्वारा लगाए गए कैपिटेशन शुल्क के प्रचलन  को रोकने में भी मदद मिलेगी। इसके अलावा, छात्रों को एक ही राज्य में नामांकन के लिए कई एजेंसियों के पास आवेदन नहीं करना पड़ेगा।
एनईईटी यूजी 2016 के सीबीएसई द्वारा संचालित किए जाने के बाद, मंत्रालय ने राज्यों और अन्य हितधारकों के परामर्श से राज्यों को 09 अगस्त, 2016 को एक परामर्शदात्री जारी किया था कि वे 2016-17 के सत्र के लिए एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए संयुक्त परामर्श आयोजित करने को वरीयता दे सकते हैं। मंत्रालय के दृष्टांत पर, यूजीसी ने 15 सितम्बर, 2016 के पत्र के माध्यम से सभी मानद विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया था कि वे या तो राज्य सरकारों / केन्द्र सरकार द्वारा या एनआईआईटी में प्राप्त अंकों के आधार पर अपनी एजेंसियों के माध्यम से आयोजित समान पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए सामान्य परामर्श के भी हिस्सा होंगे।  
2017-18 सत्र के लिए स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में नामांकन हेतु राज्य स्तर पर आम परामर्श के लिए परामर्शदात्री 05 दिसम्बर, 2016 को दुहराई गई थी। परामर्शदात्री जारी की गई थी कि क्योंकि परामर्श को किसी नियम के तहत शामिल नहीं किया गया था और पूरी प्रवेश प्रक्रिया एक प्रशासनिक तंत्र के रूप में विकसित हुई थी। लेकिन अब स्नातक चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 1997 और स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा विनियमन, 2000 में संशोधन संबंधी सूचनाओं के साथ सामान्य परामर्श के लिए कानूनी प्रावधानों को सक्षम बना दिया गया है।
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बुधवार, 8 मार्च 2017

पटना में गंगा में सीवेज प्रदूषण को रोकने को 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी

नई दिल्ली : पटना में गंगा को स्वच्छ रखने के प्रयास के तहत शहर में सक्षम सीवेज ट्रीटमेंट ढांचा तैयार करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत 1050 करोड़ रुपए की परियोजनाओं को मंजूरी का बड़ा फैसला लिया गया है। यह राशि दो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाने, मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण, दो पंपिंग स्टेशनों के निर्माण और लगभग 400 किलोमीटर तक का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने पर खर्च की जाएगी।
शहर के सैदपुर क्षेत्र में जोन में 60 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी बनाने और 227 किलोमीटर के नए भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने के लिए कुल 600 करोड़ रुपए लागत का ठेका यूईएम इंडिया प्रा. लि. और ज्योति बिल्डटेक प्रा. लि. को दिया गया है। तीन अन्य फर्मों - लार्सन एंड टर्बो लि., वोल्टास लि. और जीएए जर्मनी जेवी - को शहर के बेऊर क्षेत्र में 23 एमएलडी वाले एसटीपी के निर्माण, 20 एमएलडी के मौजूदा एसटीपी के नवीनीकरण और लगभग 180 किलोमीटर का नया भूमिगत सीवेज नेटवर्क बिछाने की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए 450 करोड़ रुपए आवंटित होंगे। इसके दायरे में सैदपुर और बेऊर क्षेत्र में क्रमशः 83 एमएलडी और 50 एमएलडी क्षमता वाले मुख्य पंपिंग स्टेशनों का निर्माण भी शामिल है। ठेकों में 10 साल की अवधि के लिए एसटीपी और सीवेज नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की लागत भी शामिल है।
इन परियोजनाओं का उद्देश्य न सिर्फ पटना की मौजूदा सीवेज व्यवस्था को सुधारना है, बल्कि अगले एक दशक तक शहर में बढ़ती आबादी की संभावना को ध्यान में रखकर सीवेज ट्रीटमेंट का लक्ष्य भी शामिल है। विश्व बैंक के एक सर्वेक्षण के अनुसार, पटना ढांचागत विकास के मामले में दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ते शहरों में से एक है। इन परियोजनाओं के समयबद्ध परिचालन के बाद इन क्षेत्रों से गंगा नदी में किसी भी प्रकार असंशोधित जल नहीं बहाया जाएगा और इससे गंगा के पवित्र जल को प्रदूषित होने से बचाने में मदद मिलेगी। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) निर्माण-कार्य की प्रगति की निगरानी करेगा।
100 वर्ग किलोमीटर से अधिक के क्षेत्र में फैले पटना शहर को छह सीवरेज क्षेत्रों - दीघा, बेऊर, सैदपुर, कंकड़बाग, पहाड़ी और करमालीचक में बांटा गया है। करमालीचक क्षेत्र में सीवेज संबंधित परियोजनाओं के लिए जल्दी ही अनुबंध किए जाने की उम्मीद है।
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